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ऑफिस ट्रेनिंग ट्रिप में छुपी हुई जज्बात-Office Trip Romance Story


Office Trip Romance Story

25 वर्षीय कॉलेज छात्र राकेश, 30 साल की आत्मविश्वासी महिला सुनीता के साथ एक बाहरी प्रशिक्षण कार्यक्रम में था। उनके दिन लंबे काम से भरे होते थे, लेकिन जैसे-जैसे सूरज ढलता गया, देर रात की चाय के ब्रेक के दौरान उनका आपसी विश्वास बढ़ने लगा। जिस होटल के कमरे में वे साथ रहते थे, वह सादा था, एक बड़ा बिस्तर और एक छोटी सी मेज थी जहाँ वे अक्सर बैठकर चाय की चुस्कियाँ लेते और कहानियाँ सुनाते थे। Office Trip Romance Story

एक शाम, एक बेहद थका देने वाले दिन के बाद, राकेश और सुनीता अपने कमरे में अकेले थे, हवा में एक अनकहा तनाव छाया हुआ था। ढीली ब्लाउज और स्कर्ट पहने, कंधों पर लहराते बालों वाली सुनीता ने राकेश को एक हल्की मुस्कान के साथ देखा। “जानते हो राकेश,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, “मुझे तुम हमेशा से बहुत दिलचस्प लगते रहे हो।”

राकेश का दिल धड़क रहा था, उसने उसकी नज़रों से नज़रें मिलाईं। “सच में? मैं भी हमेशा से तुम्हारे बारे में यही सोचता रहा हूँ, सुनीता।” उसने हाथ बढ़ाया, उसकी उंगलियाँ उसकी उंगलियों से छू गईं। इस स्पर्श से दोनों में बिजली सी दौड़ गई। सुनीता की साँसें अटक गईं और वह और करीब झुक गई, उसके होंठ थोड़े से खुल गए।

उनका पहला चुंबन कोमल, अनिश्चित, एक सौम्य अन्वेषण था। लेकिन जैसे-जैसे उनके होंठ एक-दूसरे से जुड़े, चुंबन गहरा होता गया, और ज़्यादा जोशपूर्ण होता गया। राकेश के हाथ सुनीता की कमर पर आ गए, उसे अपनी ओर खींचते हुए, जबकि उसकी उंगलियाँ उसके बालों में उलझी हुई थीं। यह चुंबन एक वादा था, कुछ और गहन होने की शुरुआत।

सुनीता ने चुंबन तोड़ा, उसकी आँखें वासना से गहरी हो गईं। “मैं तुम्हें चाहती हूँ, राकेश,” उसने भारी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा। राकेश ने प्रतिक्रिया में उसका ब्लाउज उसके सिर के ऊपर खींच दिया, जिससे उसकी लेस वाली ब्रा दिखाई देने लगी। उसने उसके स्तनों को अपने हाथों में लिया, उन्हें एक साथ दबाया, उसके अंगूठे कपड़े के ऊपर से उसके निप्पलों पर फिर रहे थे। सुनीता कराह उठी, उसका सिर पीछे झुक गया, उसका शरीर उसके स्पर्श में झुक गया। Office Trip Romance Story

राकेश के मुँह ने उसकी गर्दन को चूमा और चूसा, उसे अपना बना लिया। उसके हाथ उसकी पीठ पर गए, और चतुर उंगलियों से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। जैसे ही उसके स्तन आज़ाद हुए, राकेश के मुँह में पानी आ गया। उसने एक निप्पल मुँह में लिया और ज़ोर से चूसा, जबकि उसका हाथ दूसरे से खेल रहा था। सुनीता हाँफने लगी, उसकी उंगलियाँ उसके कंधों को जकड़ रही थीं।

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उसने उसे बिस्तर पर धकेल दिया और उसके ऊपर बैठ गई। उसके हाथों ने उसकी कमीज़ को झटपट उतार दिया, उसके नाखून उसकी छाती को खुरच रहे थे। उसने उसे ज़ोर से चूमा, उसकी जीभ उसके मुँह को टटोल रही थी, उसे अपने कब्ज़े में ले रही थी। राकेश कराह उठा, उसके हाथ उसके कूल्हों को जकड़े हुए थे, उसे अपनी ओर खींच रहे थे।

अब सुनीता की स्कर्ट और उसके बाद उसकी पैंटी उतरने वाली थी। राकेश की साँसें गले में अटक गईं जब उसने पहली बार उसका नंगा बदन देखा। वह खूबसूरत थी, उसके उभार मुलायम और आकर्षक थे। उसने हाथ बढ़ाया, उसकी उंगलियाँ उसकी गीली योनि पर पड़ीं। सुनीता कराह उठी, उसके कूल्हे उसके हाथ से टकरा रहे थे।

राकेश का मुँह उसकी उँगलियों के पीछे-पीछे चला गया, उसकी जीभ उसकी तहों को चाट रही थी। सुनीता के हाथों ने चादर पकड़ ली, उसका शरीर खुशी से काँप रहा था। राकेश की जीभ उसकी योनि को सहला रही थी, चूस रही थी और चाट रही थी, उसे पागल कर रही थी। वह चीख पड़ी, उसका शरीर काँप रहा था जैसे ही वह झड़ी, उसका रस उसकी जीभ पर लग गया।

राकेश खड़ा हो गया, जल्दी से अपनी पैंट उतार दी। उसका लिंग सख्त हो गया था, ज़रूरत से धड़क रहा था। सुनीता ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखें वासना से भरी थीं। “मुझे चोदो, राकेश,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ भारी थी। राकेश को दोबारा कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी। उसने खुद को उसके द्वार पर स्थापित कर लिया, उसका लिंग उसकी गीली परतों से सट रहा था।

एक तेज़ धक्के के साथ, वह उसके अंदर था। सुनीता हांफने लगी, उसके नाखून उसकी पीठ में गड़ गए। राकेश हिलने लगा, उसके कूल्हे ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे। सुनीता ने उसके धक्कों का सामना किया, उसका शरीर उसके साथ तालमेल बिठा रहा था। उनके शरीर पसीने से तर थे, उनकी साँसें उखड़ी हुई थीं।

राकेश का मुँह सुनीता के मुँह से लग गया, उनकी जीभें आपस में उलझ गईं। वह उसके होंठों पर खुद का स्वाद ले सकता था, जो उसे दिए गए आनंद की याद दिला रहा था। सुनीता के हाथ उसकी गांड पर चले गए, उसे और गहराई तक खींचते हुए, उसे और उत्तेजित करते हुए। राकेश ने उसकी बात मान ली, उसके धक्के तेज़ और तेज़ होते जा रहे थे।

सुनीता का शरीर तनावग्रस्त हो गया, उसकी आंतरिक दीवारें उसके लिंग को जकड़ रही थीं। वह चीख पड़ी, उसका शरीर काँप रहा था जब वह फिर से झड़ी। उसकी योनि द्वारा उसके लिंग को दूध पिलाने के एहसास ने राकेश को चरम पर पहुँचा दिया। वह कराह उठा, उसका शरीर तनावग्रस्त हो गया जब वह झड़ा, उसका लिंग उसके अंदर धड़क रहा था।

वे एक साथ लेटे रहे, उनके शरीर एक-दूसरे से लिपटे हुए थे, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। सुनीता ने राकेश की ओर देखा, उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान थी। “यह अद्भुत था,” उसने फुसफुसाया। राकेश भी मुस्कुराया, उसकी उंगलियाँ उसकी त्वचा पर आकृतियाँ बना रही थीं। “यह अद्भुत था,” उसने सहमति जताई। Desi Office Trip Romance Story

जब वे वहाँ लेटे रहे, उनके शरीर अभी भी जुड़े हुए थे, उन्हें पता था कि यह तो बस शुरुआत है। उनका जुड़ाव सिर्फ़ शारीरिक नहीं था; यह भावनात्मक था, एक ऐसा बंधन जो समय के साथ और मज़बूत होता जाएगा। और जब वे सोने लगे, तो उन्हें पता था कि यह किसी खूबसूरत चीज़ की शुरुआत थी।

अगली सुबह, अलार्म की आवाज़ से उनकी नींद खुली, उनके शरीर अभी भी आपस में उलझे हुए थे। वे एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए, उनके बीच एक मौन वादा गुज़र रहा था। उन्हें पता था कि उनका प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन उनकी यात्रा अभी शुरू ही हुई थी। और जैसे ही वे दिन के लिए तैयार हुए, उन्हें पता था कि चाहे कुछ भी हो जाए, उनके पास हमेशा यह पल, यह याद, संजोने के लिए रहेगी।

जब वे हाथों में हाथ डाले होटल के कमरे से बाहर निकले, तो उनका स्वागत भाइयों ने किया।

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